महिला से कथित बदसलूकी का मामला बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में गैरसैंण में अपने हक की मांग कर रही महिलाओं पर लाठीचार्ज की तस्वीरें उत्तराखण्ड आज भी नहीं भूला है।
यही नहीं, उनके कार्यकाल में जनता दरबार में अपनी समस्या लेकर पहुंची 57 वर्षीय विधवा शिक्षिका उत्तरा बहुगुणा के साथ हुआ घटनाक्रम भी प्रदेश ने देखा था। वर्षों तक दुर्गम क्षेत्र में सेवा देने के बाद वह स्थानांतरण की गुहार लेकर पहुंची थीं, लेकिन बात इतनी बढ़ी कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मंच से ही उन्हें सस्पेंड करने और पुलिस हिरासत में लेने का आदेश दे दिया।
अब उनके पूर्व OSD अभय रावत पर महिला से कथित बदसलूकी के आरोप सामने आना गंभीर मामला है।
सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं है—महिलाओं के साथ व्यवहार और उनके सम्मान का है। किसी पद, रसूख या राजनीतिक पहचान की आड़ में महिला के सम्मान से समझौता नहीं होना चाहिए। मामले की निष्पक्ष जांच हो और पूरे तथ्य जनता के सामने आएं।
